शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
हां, तेरी मासूमियत का ये अंदाज़ मेरे सपनों के आंगन में,
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 867]
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 867]