शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
मेरे हमदम, तेरी दीवानगी का ये आलम मेरी हर सुबह ओ शाम में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 646]
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 646]