शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
बस इतना समझ लो, तेरी दीवानगी का ये आलम मेरी हर सुबह ओ शाम में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 230]
गुलाब की तरह महक रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 230]