शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
हां, तेरी सांसों की महक मेरी हर सुबह ओ शाम में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 342]
गुलाब की तरह महक रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 342]