शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
हर घड़ी, तेरे हुस्न का ये दीदार मेरी आँखों की पुतलियों में,
हमेशा के लिए बस गया है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 277]
हमेशा के लिए बस गया है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 277]