शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
याद रखना, तेरी इबादत का सुरूर मेरी हर एक दुआ में,
दिल को दीवाना बना रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 543]
दिल को दीवाना बना रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 543]