शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
यकीन मानो, तेरा ख्याल मेरी रूह में मेरे रोम-रोम के अहसास में,
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 394]
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 394]