शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
ऐ सनम, तेरी यादों का ये कारवां मेरी खुशियों के आशियाने में,
ज़िंदगी को रोशन कर रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 345]
ज़िंदगी को रोशन कर रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 345]