शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
ज़िंदगी के सफर में, तेरी मासूम आँखों का नूर मेरी रूह की गहराइयों में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 110]
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 110]