शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
यूं तो, तेरी हर बात का मिठास मेरी हर मुराद में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 779]
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 779]