शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
ज़माने से कह दो, तेरी बाहों का ये आशियाना मेरे रोम-रोम के अहसास में,
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि तेरे दम से ही मेरी ज़िंदगी का हर एक लम्हा गुलज़ार है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 378]
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि तेरे दम से ही मेरी ज़िंदगी का हर एक लम्हा गुलज़ार है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 378]