शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
सच है, तेरी मासूम आँखों का नूर मेरी रूह की गहराइयों में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 366]
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 366]