शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
सदा, तेरी मुस्कुराहट की चमक मेरी खामोश इबादतों में,
जादू की तरह असर कर रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 632]
जादू की तरह असर कर रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 632]