शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
बस इतना समझ लो, तेरे इश्क की ये बारिश मेरी आँखों की पुतलियों में,
हमेशा के लिए बस गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 805]
हमेशा के लिए बस गया है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 805]