शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
बस इतना समझ लो, तेरी मोहब्बत की खुशबू मेरे दिल के हर कोने में,
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 205]
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 205]