शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी
बस इतना समझ लो, तेरी खामोशी का पैगाम मेरी सूनी रातों में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी वफ़ा ही मेरे जीने की सबसे बड़ी और मजबूत वजह है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 705]
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी वफ़ा ही मेरे जीने की सबसे बड़ी और मजबूत वजह है। [शुभ रात्रि (गुड नाइट) शायरी 705]