शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
तेरे चेहरे का तबस्सुम मेरी हर मुराद में,
ज़िंदगी को रोशन कर रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 342]
ज़िंदगी को रोशन कर रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 342]