शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
मेरे हमदम, तेरे हुस्न का ये दीदार मेरी सूनी रातों में,
दिल को दीवाना बना रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 124]
दिल को दीवाना बना रहा है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 124]