शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
तेरी मासूमियत का ये अंदाज़ मेरी हर एक दुआ में,
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 42]
नया उजाला बिखेर रहा है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 42]