शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
सुनो, तेरे प्यार का असर मेरी खामोश इबादतों में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 243]
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 243]