शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
अक्सर, तेरी वफाओं का ये समंदर मेरे ख्यालों की दुनिया में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 779]
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 779]