शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
यूं तो, तेरी मासूमियत का ये अंदाज़ मेरी हर एक दुआ में,
नया उजाला बिखेर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 682]
नया उजाला बिखेर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 682]