शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
मेरे हमदम, तेरी वफाओं का ये समंदर मेरे ख्यालों की दुनिया में,
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 299]
इबादत की तरह पावन हो गया है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 299]