शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
दिल कहता है, तेरे कदमों की आहट मेरे सपनों के आंगन में,
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 734]
मेरी पहचान बन चुका है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 734]