शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
मेरी हर दुआ में, तेरी ज़ुल्फ़ों की हसीन छांव मेरे दिल के हर कोने में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 440]
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 440]