शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
ऐ सनम, तेरे चेहरे का तबस्सुम मेरी हर मुराद में,
ज़िंदगी को रोशन कर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 598]
ज़िंदगी को रोशन कर रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 598]