शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
बस इतना समझ लो, तेरी खामोशी का पैगाम मेरे दिल के हर कोने में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 808]
हर ग़म को मिटा रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 808]