शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी
खामोशियों के दरमियां, तेरी मासूम आँखों का नूर मेरे रोम-रोम के अहसास में,
जादू की तरह असर कर रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 341]
जादू की तरह असर कर रहा है, कि तू ही मेरी पहली और आखरी मंजिल बन चुकी है। [शुभ प्रभात (गुड मॉर्निंग) शायरी 341]