ग़ज़ल और नज़्म
मेरे हमदम, तेरी हर बात का मिठास मेरे सपनों के आंगन में,
दिल को दीवाना बना रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।
दिल को दीवाना बना रहा है, कि खुदा से अब कोई और दुआ माँगना बाकी नहीं।