ग़ज़ल और नज़्म
सदा, तेरी खामोशी का पैगाम मेरी खुशियों के आशियाने में,
हमेशा के लिए बस गया है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।
हमेशा के लिए बस गया है, कि तेरे मुस्कुराने से ही मेरी ये पूरी कायनात मुकम्मल है।
तेरी चाहत में हर इम्तिहान से गुज़र जाना है,
तुझे ही अपनी ज़िंदगी का सच्चा मक़सद बनाना है।