ग़ज़ल और नज़्म
हां, तेरी इबादत का सुरूर मेरी तकदीर के पन्नों पर,
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है।
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी बाहों का ये आशियाना ही मेरी सच्ची जन्नत है।