ग़ज़ल और नज़्म
खुदा गवाह है, तेरी धड़कनों की आवाज़ मेरे रोम-रोम के अहसास में,
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही।
गुलाब की तरह महक रहा है, कि तेरे सिवा अब किसी और की चाहत दिल में नहीं रही।