ग़ज़ल और नज़्म
सुनो, तेरी पनाहों का ये सुकून मेरी हर एक दुआ में,
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं।
हर ग़म को मिटा रहा है, कि तेरी खुशियों के लिए हम ज़माने से भी टकरा सकते हैं।