ग़ज़ल और नज़्म
मेरी हर दुआ में, तेरी सांसों की महक मेरी रूह की गहराइयों में,
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता।
बेपनाह सुकून दे रहा है, कि अब तेरे बिना एक पल भी गवारा नहीं होता।