ग़ज़ल और नज़्म
मेरी हर दुआ में, तेरी इबादत का सुरूर मेरी तकदीर के पन्नों पर,
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें।
खुदा की रहमत बन गया है, कि तेरी एक हंसी पे हम अपनी जान भी निसार कर दें।