दोस्ती और यारी शायरी
कसम से, सच्ची दोस्ती का ये अनमोल बंधन ज़िंदगी के हर एक मोड़ पर,
हर ग़म को पल भर में भुला रहा है, सच्ची दोस्ती कभी वक्त या दूरियों के साथ फीकी नहीं पड़ती। [दोस्ती और यारी शायरी 721]
हर ग़म को पल भर में भुला रहा है, सच्ची दोस्ती कभी वक्त या दूरियों के साथ फीकी नहीं पड़ती। [दोस्ती और यारी शायरी 721]