दोस्ती और यारी शायरी
हर घड़ी, यारी की ये कसम और निश्छल प्यार सुख और दुख की हर घड़ी में,
नई उम्मीद और हौसला दे रहा है, कि तेरी यारी पर हमें खुद से भी ज्यादा फख्र और नाज़ है। [दोस्ती और यारी शायरी 898]
नई उम्मीद और हौसला दे रहा है, कि तेरी यारी पर हमें खुद से भी ज्यादा फख्र और नाज़ है। [दोस्ती और यारी शायरी 898]