दोस्ती और यारी शायरी
ऐ सनम, जिगरी दोस्तों के साथ की ये महफ़िल मुश्किलों के घने अंधेरों में,
फूलों की तरह सदा महक रहा है, ये वो पवित्र बंधन है जो कभी वक्त की मार से नहीं टूटता। [दोस्ती और यारी शायरी 891]
फूलों की तरह सदा महक रहा है, ये वो पवित्र बंधन है जो कभी वक्त की मार से नहीं टूटता। [दोस्ती और यारी शायरी 891]