ब्रेकअप शायरी इन हिंदी
सच है, खामोश लबों की दबी हुई चीख मेरी यादों के खंडहर में,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 739]
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 739]