ब्रेकअप शायरी इन हिंदी
हां, तन्हाई की काली रातों का सन्नाटा मेरी तकदीर के अंधेरों में,
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 915]
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 915]