ब्रेकअप शायरी इन हिंदी
हां, तन्हाई की काली रातों का सन्नाटा मेरी यादों के खंडहर में,
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई।
सांसों को भारी कर रहा है, कि अब रोते हुए भी मुस्कुराना हमारी मजबूरी बन गई।