ब्रेकअप शायरी इन हिंदी
इश्क़ में, अपनों के दिए हुए दर्दनाक घाव मेरी उदासियों के आलम में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 857]
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [ब्रेकअप शायरी इन हिंदी 857]