बेवफा शायरी इन हिंदी
इश्क़ में, उम्मीदों के टूटने की ये सदा मेरी तन्हाई की महफ़िल में,
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [बेवफा शायरी इन हिंदी 854]
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [बेवफा शायरी इन हिंदी 854]