बेवफा शायरी इन हिंदी
मेरे हमदम, छूटे हुए हमसफर की यादें मेरी तकदीर के अंधेरों में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [बेवफा शायरी इन हिंदी 616]
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [बेवफा शायरी इन हिंदी 616]