बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
ज़िंदगी के सफर में, आंसुओं में भीगी ये पलकें मेरी भीगी आँखों में,
खामोशी से रुला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया।
खामोशी से रुला रहा है, कि दिल के ज़ख्मों को छिपाकर मुस्कुराना ही दस्तूर बन गया।