बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
इश्क़ में, सिसकती हुई सांसों का ये आलम मेरी तकदीर के अंधेरों में,
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे।
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे।