बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
हां, ख्वाबों के उजड़ने का मातम मेरे दिल के वीराने में,
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 635]
ज़िंदगी को वीरान कर रहा है, कि अब तन्हाइयों से ही दिल लगाना सीख लिया हमने। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 635]