बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
ऐ दोस्त, तन्हाई की काली रातों का सन्नाटा मेरी तकदीर के अंधेरों में,
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 840]
चेहरे की मुस्कान छीन रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 840]