बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
सदा, तन्हाई की काली रातों का सन्नाटा मेरी खामोश रातों में,
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 800]
अंदर ही अंदर जला रहा है, कि खुशियों की तलाश में सिर्फ ग़म ही ग़म हाथ लगे। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 800]