बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी
ऐ दोस्त, दिल में दफन अनकहे फ़साने मेरे सीने के अंदर,
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 990]
इस कदर चुभ रहा है हर पल, कि अब किसी पर भी ऐतबार करना नामुमकिन हो गया। [बेवफ़ा और बिछड़ने की शायरी 990]